नमस्ते दोस्तों! आप सब कैसे हैं? मुझे पता है कि आप में से बहुत से लोग कानूनी सलाहकार के तौर पर अपने करियर को लेकर जुनूनी हैं, लेकिन जब बात आती है वेतन की, तो अकसर हम थोड़ा घबरा जाते हैं, है ना?
मैंने खुद ऐसे कई साथियों को देखा है जिन्हें अपनी मेहनत और काबिलियत के हिसाब से सैलरी नहीं मिल पाती. कभी-कभी हमें लगता है कि हमारा काम इतना महत्वपूर्ण है कि हमें बिना किसी झिझक के अपनी बात रखनी चाहिए, लेकिन सही तरीका क्या है?
आजकल के माहौल में जहाँ कानूनी क्षेत्र में भी कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है और नए ट्रेंड्स आ रहे हैं, अपनी सैलरी नेगोशिएट करना एक कला बन गई है. कई बार, सिर्फ अच्छा वकील होना काफी नहीं होता; आपको यह भी पता होना चाहिए कि अपनी वैल्यू को कैसे पेश किया जाए ताकि आपको वो हक मिले जिसके आप सही हकदार हैं.
यह सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि आपके आत्मविश्वास और करियर ग्रोथ का सवाल भी है. तो दोस्तों, अगर आप भी इस उलझन से जूझ रहे हैं और जानना चाहते हैं कि एक कानूनी सलाहकार के रूप में आप अपनी सैलरी नेगोशिएशन को कैसे मास्टर कर सकते हैं, कौन से नए तरीके अपना सकते हैं, और कैसे अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रख सकते हैं ताकि आपको हमेशा बेस्ट ऑफर मिले, तो चिंता मत कीजिए!
मैं आज आपको इसी विषय पर कुछ ऐसे शानदार टिप्स और ट्रिक्स बताने वाला हूँ जो मैंने खुद आजमाए हैं और उनसे बहुत फायदा मिला है. आइए, इस लेख में हम कानूनी सलाहकारों के लिए सैलरी नेगोशिएशन के वो सारे राज़ विस्तार से जानेंगे.
अपनी कीमत को पहचानना और समझना

दोस्तों, सबसे पहले और सबसे ज़रूरी चीज़ है खुद की कीमत को समझना. कानूनी क्षेत्र में काम करते हुए मैंने देखा है कि कई बार हम अपनी काबिलियत और अनुभव को कम आंकते हैं.
हमें लगता है कि बस काम मिल जाए वही बड़ी बात है, लेकिन ऐसा नहीं है. आप जो सलाह देते हैं, जिस तरह से केस संभालते हैं, वो आपके क्लाइंट के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इस बात को हमें समझना होगा.
मेरी एक दोस्त थी, राधिका, जो वाकई में बहुत काबिल थी, लेकिन जब भी वेतन की बात आती, वो झिझक जाती थी. उसने कई सालों तक कम वेतन पर काम किया, बस इस डर से कि कहीं बेहतर मौका हाथ से निकल न जाए.
जब उसने अपनी कीमत को पहचाना और अपने अनुभव पर भरोसा करना सीखा, तो उसकी करियर ग्रोथ भी तेज़ी से हुई. इसलिए, अपनी क्षमताओं, अनुभवों और उन विशिष्ट कौशलों की एक लिस्ट बनाएं जो आपको दूसरों से अलग बनाते हैं.
आपकी विशेषज्ञता क्या है? आपने किन मुश्किल केसों को सुलझाया है? आपके पास कौन से विशेष लाइसेंस या सर्टिफिकेशन्स हैं?
यह सब आपकी कीमत को बढ़ाता है और आपको बातचीत में मजबूत स्थिति में रखता है.
अपने कौशल और अनुभव का सही मूल्यांकन
यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आपके पास ऐसे कौन से अनोखे कौशल और अनुभव हैं जो आपको बाकियों से अलग और बेहतर बनाते हैं. सिर्फ डिग्री और साल का अनुभव ही काफी नहीं है.
क्या आप किसी विशेष कानूनी क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं, जैसे कॉर्पोरेट कानून, बौद्धिक संपदा कानून, या साइबर कानून? क्या आपने किसी बड़े या महत्वपूर्ण मुक़दमे में अहम भूमिका निभाई है?
क्या आपने मुश्किल बातचीत में अपनी कंपनी या क्लाइंट के लिए बेहतर डील हासिल की है? इन सभी बातों का मूल्यांकन करें. मुझे याद है जब मैंने अपना करियर शुरू किया था, तब मैं हर छोटे-बड़े काम को सीखने के अवसर के रूप में देखता था, और धीरे-धीरे मेरी विशेषज्ञता किसी एक क्षेत्र में बनने लगी.
यही विशेषज्ञता आपको बाज़ार में एक अनोखी पहचान दिलाती है और आपकी वेतन वार्ता में एक महत्वपूर्ण हथियार बनती है. अपने पिछले सफल प्रोजेक्ट्स, क्लाइंट फीडबैक और आपके द्वारा लाए गए सकारात्मक बदलावों का एक रिकॉर्ड ज़रूर रखें, ये सब आपकी बातचीत में बहुत काम आएंगे.
बाजार में आपकी विशिष्टता क्या है?
आपकी “विशिष्टता” ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है. सोचिए, हजारों कानूनी सलाहकारों के बीच आप कैसे अलग दिखते हैं? क्या आपके पास किसी उभरते हुए क्षेत्र में गहरी जानकारी है, जैसे AI और डेटा गोपनीयता कानून?
क्या आप बहुभाषी हैं और अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट्स के साथ आसानी से काम कर सकते हैं? क्या आपके पास कानूनी प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता है, जो आजकल बहुत मांग में है?
मेरी एक सीनियर, मिस्टर वर्मा, हमेशा कहते थे कि “भीड़ का हिस्सा मत बनो, भीड़ को अपनी तरफ मोड़ो.” उन्होंने खुद को पर्यावरण कानून में इतना विशेषज्ञ बनाया कि आज उनकी फीस बाकी सभी से ज़्यादा है, क्योंकि इस क्षेत्र में उनकी जैसी समझ और अनुभव बहुत कम लोगों के पास है.
अपनी इस विशिष्टता को पहचानें और इसे अपनी बातचीत का मुख्य बिंदु बनाएं. जब आप नियोक्ता को यह समझा पाते हैं कि आप उनके लिए कुछ ऐसा ला रहे हैं जो कोई और नहीं ला सकता, तो आपकी मोलभाव करने की शक्ति अपने आप बढ़ जाती है.
रिसर्च ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है
कोई भी बातचीत बिना अच्छी तैयारी के अधूरी है, और वेतन वार्ता में रिसर्च आपकी सबसे बड़ी ताकत है. मैंने अपने करियर में कई बार देखा है कि जो लोग अच्छी रिसर्च के साथ आते हैं, वे ज़्यादा आत्मविश्वास से बात करते हैं और उन्हें बेहतर ऑफर भी मिलते हैं.
सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि आपका दोस्त या कोई और कितना कमा रहा है. आपको अपने उद्योग के औसत वेतन, अपनी भूमिका के लिए मौजूदा बाजार दरों, कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और यहां तक कि उस क्षेत्र में जहां आप काम कर रहे हैं, जीवन-यापन की लागत के बारे में भी गहन जानकारी होनी चाहिए.
आज के डिजिटल युग में, यह जानकारी आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध है. विभिन्न जॉब पोर्टल्स, लिंक्डइन, ग्लासडोर और अन्य पेशेवर नेटवर्किंग साइट्स पर आप ऐसी जानकारी पा सकते हैं.
मुझे याद है एक बार मेरे एक क्लाइंट ने एक नए कानूनी सलाहकार को नियुक्त करने के लिए विज्ञापन दिया था. कई उम्मीदवारों ने आवेदन किया, लेकिन जिसने सबसे ज़्यादा रिसर्च की थी, उसे ही सबसे अच्छा पैकेज मिला, क्योंकि वह जानता था कि वह क्या मांग रहा है और क्यों.
बाजार वेतन का गहन विश्लेषण
आपको अपनी भूमिका, अनुभव स्तर और भौगोलिक स्थान के आधार पर बाजार में प्रचलित वेतन श्रेणियों का पूरा विश्लेषण करना होगा. ऑनलाइन वेतन कैलकुलेटर, उद्योग रिपोर्ट और पेशेवर संघों के सर्वेक्षण इस जानकारी का सबसे अच्छा स्रोत हैं.
उदाहरण के लिए, यदि आप मुंबई में एक कॉर्पोरेट वकील के रूप में काम कर रहे हैं, तो दिल्ली या बैंगलोर में उसी भूमिका के लिए वेतनमान अलग हो सकता है. इसी तरह, एक फ्रेशर और 5 साल के अनुभव वाले वकील की सैलरी में ज़मीन-आसमान का फर्क होगा.
यह रिसर्च आपको एक यथार्थवादी वेतन सीमा निर्धारित करने में मदद करेगी और आपको बहुत ज़्यादा या बहुत कम मांगने से रोकेगी. मेरे एक सहकर्मी ने एक बार बिना रिसर्च के ही बहुत ज़्यादा सैलरी मांग ली थी, और उसे यह कहकर मना कर दिया गया कि उसकी उम्मीदें बाजार के हिसाब से नहीं हैं.
वहीं, एक और सहकर्मी ने अच्छी रिसर्च के बाद एक सटीक रेंज बताई और उसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया.
कंपनी की वित्तीय स्थिति और वृद्धि का अध्ययन
सिर्फ अपनी कीमत ही नहीं, बल्कि उस कंपनी को भी समझना ज़रूरी है जहाँ आप काम करने वाले हैं. क्या कंपनी अच्छा प्रदर्शन कर रही है? क्या वे लगातार बढ़ रहे हैं या आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं?
एक मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनी शायद आपको बेहतर पैकेज देने में सक्षम होगी. उनकी वार्षिक रिपोर्ट, प्रेस रिलीज़ और हालिया फंडिंग राउंड्स (यदि वे एक स्टार्टअप हैं) का अध्ययन करें.
यह जानकारी आपको यह समझने में मदद करेगी कि कंपनी वेतन के लिए कितना लचीली हो सकती है. साथ ही, यदि कंपनी के पास स्टॉक ऑप्शंस या प्रदर्शन-आधारित बोनस जैसे लाभ देने की क्षमता है, तो यह आपकी बातचीत का एक हिस्सा बन सकता है.
मैंने देखा है कि जब आप कंपनी के लक्ष्यों और क्षमताओं को समझते हुए अपनी मांग रखते हैं, तो आपकी बात में ज़्यादा दम होता है और नियोक्ता को भी लगता है कि आप केवल पैसे पर नहीं, बल्कि कंपनी की सफलता पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
बातचीत का सही समय और तरीका
सैलरी नेगोशिएशन सिर्फ इस बारे में नहीं है कि आप क्या मांगते हैं, बल्कि इस बारे में भी है कि आप इसे कब और कैसे मांगते हैं. यह एक कला है, विज्ञान से कहीं ज़्यादा.
मेरे अनुभव में, सही समय पर सही बात कहना बहुत मायने रखता है. एक बार मेरे एक जूनियर को एक जॉब ऑफर मिला था, और उसने तुरंत फोन पर ही सैलरी के बारे में पूछना शुरू कर दिया, बिना यह समझे कि कंपनी क्या पेशकश कर रही है.
नतीजतन, उसे वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वह उम्मीद कर रहा था. आदर्श रूप से, आपको तभी बातचीत शुरू करनी चाहिए जब आपको नौकरी का औपचारिक प्रस्ताव मिल जाए. इससे पहले, आपका ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि आप अपनी योग्यताएं कैसे प्रस्तुत करते हैं और कंपनी के लिए आप कितने महत्वपूर्ण हैं.
बातचीत करते समय हमेशा सम्मानजनक और पेशेवर रहें. कभी भी अल्टीमेटम न दें या धमकी भरा लहजा न अपनाएं. याद रखें, आप एक दीर्घकालिक संबंध बना रहे हैं, न कि केवल एक लेनदेन कर रहे हैं.
सही समय पर अपनी बात रखना
जैसा कि मैंने बताया, नौकरी का औपचारिक प्रस्ताव मिलने के बाद ही वेतन पर बातचीत करना सबसे अच्छा है. इससे पहले, आप केवल अपनी वेतन अपेक्षाओं की एक रेंज बता सकते हैं, लेकिन कोई निश्चित आंकड़ा नहीं.
जब कंपनी आपको एक प्रस्ताव देती है, तो इसका मतलब है कि वे आपको चाहते हैं, और इस बिंदु पर आपकी मोलभाव करने की शक्ति बढ़ जाती है. प्रस्ताव मिलते ही तुरंत जवाब न दें.
कुछ समय लें (जैसे 24-48 घंटे) और प्रस्ताव का ध्यानपूर्वक मूल्यांकन करें. इससे आपको अपनी रिसर्च को अंतिम रूप देने और अपनी रणनीति तैयार करने का मौका मिलेगा.
मेरे एक दोस्त ने एक बार यही गलती की थी कि उसे जैसे ही ऑफर मिला, उसने झट से ‘हां’ कह दिया, और बाद में उसे पता चला कि वह और भी बेहतर डील कर सकता था. इसलिए, हड़बड़ी न करें, सोच-समझकर कदम उठाएं.
प्रभावशाली संचार कौशल का प्रदर्शन
आपकी बातचीत का तरीका आपकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. स्पष्ट, संक्षिप्त और आत्मविश्वासपूर्ण ढंग से संवाद करें. अपनी मांगों का समर्थन करने के लिए हमेशा डेटा और तर्क का उपयोग करें.
यह मत कहो, “मुझे और पैसे चाहिए.” इसके बजाय कहो, “मेरी रिसर्च के अनुसार, इस भूमिका और मेरे अनुभव के लिए बाजार दर X से Y के बीच है, और मुझे लगता है कि मेरे विशेष कौशल (उदाहरण के लिए, मेरी साइबर कानून की विशेषज्ञता) को देखते हुए, Y के करीब की राशि उचित होगी.” अपनी बात रखते समय सकारात्मक भाषा का प्रयोग करें.
सुनें कि नियोक्ता क्या कह रहा है, उनकी चिंताओं को समझें और समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाएं. मुझे एक बार एक इंटरव्यू में एक उम्मीदवार ने अपनी बात इतने अच्छे से रखी थी कि भले ही हमने उसे उसकी मांगी हुई पूरी रकम नहीं दी, लेकिन उसके आत्मविश्वास और तार्किक प्रस्तुति के कारण हमने उसे एक बेहतर पैकेज देने का फैसला किया.
विकल्पों को खुला रखना
बातचीत करते समय, हमेशा एक कदम आगे की सोचें. यदि आपके पास एक से अधिक नौकरी के प्रस्ताव हैं, तो इसका उल्लेख (शिष्टाचारपूर्वक) करें. इससे आपकी मोलभाव करने की शक्ति बढ़ती है.
हालांकि, कभी भी झूठ न बोलें या बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करें, क्योंकि इससे आपकी विश्वसनीयता प्रभावित होगी. आप यह कह सकते हैं, “मुझे कुछ अन्य कंपनियों से भी प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन मैं आपकी कंपनी में काम करने के लिए सबसे ज़्यादा उत्साहित हूं, क्योंकि…” इससे नियोक्ता को यह संकेत मिलेगा कि आप एक मूल्यवान उम्मीदवार हैं और वे आपको बनाए रखने के लिए ज़्यादा प्रयास कर सकते हैं.
मुझे याद है एक बार मैंने इसी रणनीति का इस्तेमाल किया था और मुझे अपने पसंदीदा कंपनी से एक बहुत बेहतर ऑफर मिला था. यह सिर्फ सैलरी के बारे में नहीं है, बल्कि आपके करियर पथ के बारे में भी है.
सिर्फ सैलरी ही नहीं, अन्य लाभ भी महत्वपूर्ण
दोस्तों, अक्सर हम सिर्फ मासिक वेतन पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन कानूनी क्षेत्र में, खासकर आज के समय में, कुल कंपनसेशन पैकेज का एक बड़ा हिस्सा गैर-मौद्रिक लाभों से आता है.
मैंने अपने करियर में देखा है कि कई बार एक अच्छी बेस सैलरी वाला ऑफर, अन्य लाभों की कमी के कारण एक औसत बेस सैलरी वाले लेकिन बेहतरीन लाभों वाले ऑफर से कहीं ज़्यादा खराब हो सकता है.
आपको छुट्टियों, स्वास्थ्य बीमा, पेशेवर विकास के अवसर, बोनस, स्टॉक विकल्प, रिटायरमेंट प्लान, फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑप्शंस और यहां तक कि पार्किंग या भोजन जैसी सुविधाओं पर भी विचार करना चाहिए.
ये सभी चीजें आपके समग्र कल्याण और वित्तीय सुरक्षा में योगदान करती हैं. मेरी एक जूनियर साथी ने एक ऐसी फर्म में नौकरी छोड़ दी थी जो उसे बहुत अच्छी सैलरी दे रही थी, लेकिन उसके पास कोई स्वास्थ्य बीमा या पेशेवर प्रशिक्षण के अवसर नहीं थे.
उसने एक ऐसी फर्म में स्विच किया जहाँ सैलरी थोड़ी कम थी, लेकिन उसने एक बेहतरीन हेल्थकेयर प्लान और साल में दो बार ट्रेनिंग के अवसर हासिल किए, जिससे वह ज़्यादा खुश और सुरक्षित महसूस करती थी.
पैकेज में शामिल अन्य फायदे
जब आप एक नौकरी के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहे हों, तो केवल मासिक या वार्षिक वेतन के आंकड़े को न देखें. एक विस्तृत सूची बनाएं जिसमें स्वास्थ्य बीमा (आपके और आपके परिवार के लिए), जीवन बीमा, डेंटल और विजन प्लान शामिल हों.
इसके अलावा, देखें कि क्या कंपनी आपको पेड टाइम ऑफ (PTO), बीमारी की छुट्टियां, और मैटरनिटी/पैटर्निटी लीव जैसी सुविधाएं दे रही है. कई फर्में प्रदर्शन-आधारित बोनस, प्रॉफिट-शेयरिंग प्लान या एंड-ऑफ-ईयर बोनस भी देती हैं जो आपकी कुल आय को काफी बढ़ा सकते हैं.
कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए जिम सदस्यता, भोजन वाउचर, या यात्रा भत्ता भी प्रदान करती हैं. ये सभी सुविधाएं आपकी गुणवत्तापूर्ण जीवनशैली के लिए बहुत मायने रखती हैं और आपको एक अच्छी बचत करने में भी मदद कर सकती हैं.
दीर्घकालिक करियर विकास के अवसर
एक कानूनी सलाहकार के रूप में, आपका करियर सिर्फ आज की सैलरी के बारे में नहीं है, बल्कि आपके भविष्य की संभावनाओं के बारे में भी है. क्या कंपनी आपको पेशेवर विकास के अवसर प्रदान कर रही है?
क्या वे आपको सेमिनार, कॉन्फ्रेंस या अतिरिक्त सर्टिफिकेशन कोर्स में भाग लेने के लिए वित्तीय सहायता या समय देंगे? क्या वहाँ मेंटरशिप प्रोग्राम हैं जो आपको अनुभवी वकीलों से सीखने का मौका देंगे?
क्या पदोन्नति के स्पष्ट रास्ते मौजूद हैं? मैंने देखा है कि कई बार कम शुरुआती सैलरी वाला ऑफर भी बेहतर हो सकता है यदि वह आपको असाधारण विकास के अवसर प्रदान करता हो.
मेरी एक दोस्त ने एक ऐसी फर्म में काम करना स्वीकार किया जहाँ शुरुआती वेतन थोड़ा कम था, लेकिन फर्म ने उसे एक विशेष अंतर्राष्ट्रीय कानूनी कार्यक्रम में भाग लेने का पूरा खर्च दिया, जिससे उसकी विशेषज्ञता और नेटवर्किंग इतनी बढ़ गई कि कुछ सालों में ही वह एक बड़ी पद पर पहुंच गई.
ये अवसर आपके करियर को एक नई दिशा दे सकते हैं और भविष्य में आपकी कमाई की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकते हैं.
आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण
सैलरी नेगोशिएशन की लड़ाई आधे से ज़्यादा मानसिक होती है. अगर आप आत्मविश्वास से भरे हैं और आपका दृष्टिकोण सकारात्मक है, तो आप आधी लड़ाई वहीं जीत जाते हैं.
मुझे याद है जब मैं पहली बार एक बड़ी फर्म के साथ अपनी सैलरी के लिए बातचीत कर रहा था, मैं बहुत घबराया हुआ था. मेरा आत्मविश्वास डगमगा रहा था, और इसका असर मेरी बात पर भी पड़ रहा था.
लेकिन फिर मैंने खुद को संभाला, अपनी रिसर्च को याद किया, और खुद को समझाया कि मैं इस लायक हूं. और यकीन मानिए, मेरा आत्मविश्वास बढ़ते ही मेरी बात में दम आ गया.
आत्मविश्वास का मतलब घमंड नहीं है; इसका मतलब है अपनी क्षमताओं और अपने मूल्य पर दृढ़ विश्वास रखना. जब आप खुद पर विश्वास करते हैं, तो दूसरे भी आप पर विश्वास करते हैं.
एक सकारात्मक दृष्टिकोण आपको मुश्किल बातचीत को भी सहजता से संभालने में मदद करता है, और आपको एक समाधान-उन्मुख व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है.
तैयारी और मानसिक दृढ़ता

आत्मविश्वास यूं ही नहीं आता, यह अच्छी तैयारी से आता है. अपनी रिसर्च को पूरी तरह से करें, उन बिंदुओं को नोट करें जिन पर आप बातचीत करना चाहते हैं, और अपने तर्कों का अभ्यास करें.
कल्पना करें कि आप बातचीत के दौरान किन सवालों का सामना कर सकते हैं और आप उनका जवाब कैसे देंगे. मानसिक दृढ़ता का अर्थ है शांत रहना, दबाव में भी मुस्कुराते रहना और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना.
यदि आपको एक कम आकर्षक प्रस्ताव मिलता है, तो निराश न हों. विनम्रता से अपनी चिंताओं को व्यक्त करें और एक प्रति-प्रस्ताव पेश करें. मेरे एक सीनियर ने मुझे हमेशा सिखाया था कि “नेगोशिएशन एक शतरंज का खेल है, जहां आपको अपनी अगली चाल पहले से सोचनी होती है.” जितनी अच्छी आपकी तैयारी होगी, उतनी ही मज़बूत आपकी मानसिक दृढ़ता होगी.
नकारात्मकता से बचें और समाधान पर ध्यान दें
बातचीत के दौरान नकारात्मक या आक्रामक होने से बचें. यदि आपको ऐसा लगे कि बातचीत एक गतिरोध पर पहुंच गई है, तो शांत रहें. नियोक्ता की बात ध्यान से सुनें और उनकी चिंताओं को समझने की कोशिश करें.
आपका लक्ष्य एक ऐसा समाधान ढूंढना होना चाहिए जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो. कभी भी दूसरे प्रस्तावों की तुलना में अपनी वर्तमान या पिछली कंपनियों की बुराई न करें.
यह आपको एक नकारात्मक व्यक्ति के रूप में पेश करेगा. इसके बजाय, सकारात्मक भाषा का प्रयोग करें और यह बताएं कि आप इस अवसर के लिए कितने उत्साहित हैं और आप कंपनी में क्या योगदान दे सकते हैं.
मेरा एक मित्र हमेशा बातचीत को “हम दोनों के लिए जीत” की स्थिति में लाने की कोशिश करता था, और इसी दृष्टिकोण के कारण उसे हमेशा बेहतर परिणाम मिले.
“ना” कहने की हिम्मत रखना
कभी-कभी सबसे अच्छी बातचीत की रणनीति यह जानना होता है कि कब “ना” कहना है. यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन मेरे अनुभव में, “ना” कहने की क्षमता आपको ज़्यादा मजबूत स्थिति में खड़ा करती है.
इसका मतलब यह नहीं है कि आप हर प्रस्ताव को ठुकरा दें, बल्कि इसका मतलब है कि आप अपनी न्यूनतम स्वीकार्य सीमा को जानते हैं और यदि कोई प्रस्ताव उस सीमा से कम है, तो आप उसे अस्वीकार करने के लिए तैयार हैं.
बहुत से कानूनी सलाहकार, खासकर अपने करियर की शुरुआत में, किसी भी नौकरी को स्वीकार करने को तैयार हो जाते हैं, सिर्फ इसलिए कि उन्हें काम चाहिए. लेकिन यह आपको एक ऐसी स्थिति में धकेल सकता है जहाँ आप कम वेतन पर काम कर रहे हों और लंबे समय में असंतुष्ट महसूस करें.
मुझे याद है एक बार मुझे एक बहुत प्रतिष्ठित फर्म से एक ऑफर मिला था, लेकिन सैलरी मेरी उम्मीदों से काफी कम थी. मैंने बहुत सोचा और अंत में उसे अस्वीकार करने का फैसला किया.
यह मुश्किल था, लेकिन इस फैसले ने मुझे बाद में एक बेहतर अवसर खोजने में मदद की जो मेरी अपेक्षाओं के अनुरूप था.
कब और कैसे एक प्रस्ताव को अस्वीकार करें
“ना” कहने का सही समय तब होता है जब आपको लगता है कि प्रस्ताव आपकी मूल्य, आपकी आवश्यकताओं या आपकी करियर आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं है. यदि आपने अपनी रिसर्च की है और आपको पता है कि आप बेहतर के लायक हैं, तो एक ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार न करें जो आपको कम आंकता है.
अस्वीकार करते समय हमेशा विनम्र और पेशेवर रहें. धन्यवाद कहें, अवसर के लिए सराहना व्यक्त करें, और समझाएं कि क्यों प्रस्ताव आपकी वर्तमान ज़रूरतों या करियर लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है.
आप यह भी कह सकते हैं कि आप भविष्य में उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक रहेंगे. इससे आपके संबंध खराब नहीं होंगे और हो सकता है कि वे बाद में एक बेहतर प्रस्ताव के साथ वापस आएं.
अपनी सीमाओं को समझना
प्रत्येक व्यक्ति की वित्तीय ज़रूरतें और करियर लक्ष्य अलग-अलग होते हैं. अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय सीमाओं को समझना महत्वपूर्ण है. क्या आप एक निश्चित न्यूनतम वेतन के बिना अपना किराया या ऋण नहीं चुका सकते?
क्या आप एक ऐसे पद पर काम करने को तैयार हैं जहाँ विकास के अवसर सीमित हों, भले ही वेतन अच्छा हो? इन सवालों के जवाब आपको अपनी “चलने की रेखा” निर्धारित करने में मदद करेंगे.
यह आपकी वह न्यूनतम सीमा है जिसके नीचे आप किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे. जब आप अपनी इन सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर लेते हैं, तो बातचीत करना आसान हो जाता है, क्योंकि आप जानते हैं कि आप क्या स्वीकार कर सकते हैं और क्या नहीं.
लंबे समय के लक्ष्यों पर ध्यान
दोस्तों, सैलरी नेगोशिएशन सिर्फ आज की सैलरी स्लिप के बारे में नहीं है, बल्कि आपके पूरे करियर पथ और भविष्य की संभावनाओं के बारे में भी है. मैंने अपने करियर में देखा है कि कई बार लोग तात्कालिक लाभों पर इतना ज़्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं कि वे उन अवसरों को खो देते हैं जो उन्हें दीर्घकालिक रूप से ज़्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं.
एक अच्छी फर्म में कम सैलरी पर शुरुआत करना, जहाँ आपको सीखने और बढ़ने के बेहतरीन अवसर मिल रहे हों, कभी-कभी एक ऐसी फर्म में ज़्यादा सैलरी पर काम करने से बेहतर होता है जहाँ विकास के रास्ते सीमित हों.
एक कानूनी सलाहकार के रूप में, आपकी प्रतिष्ठा, आपका कौशल सेट और आपका नेटवर्क समय के साथ आपकी कमाई की क्षमता को निर्धारित करते हैं. इसलिए, जब आप बातचीत कर रहे हों, तो हमेशा यह सोचें कि यह अवसर आपके पांच या दस साल बाद के करियर लक्ष्यों में कैसे फिट बैठता है.
क्या यह आपको सही दिशा में ले जा रहा है?
आज का निर्णय, कल का आधार
आप आज जो निर्णय लेते हैं, वह आपके भविष्य का आधार बनता है. यदि आप एक ऐसे पद को स्वीकार करते हैं जो आपको नए कौशल सीखने, महत्वपूर्ण क्लाइंट्स के साथ काम करने, या एक मज़बूत पेशेवर नेटवर्क बनाने का मौका देता है, तो यह आपके भविष्य के वेतन पैकेज के लिए एक मजबूत नींव रखेगा.
मुझे याद है एक बार मेरे एक सीनियर ने एक स्टार्टअप में कम वेतन पर काम करना शुरू किया था, लेकिन उस कंपनी ने उसे बहुत सारे अनुभव और जिम्मेदारियां दीं. कुछ सालों में, वह स्टार्टअप बहुत सफल हो गया और उसके पास जो अनुभव था, वह बहुत मूल्यवान साबित हुआ.
उसने बाद में एक बड़ी फर्म में बहुत उच्च पद पर प्रवेश किया. इसलिए, केवल पैसे पर ही नहीं, बल्कि आपके सीखने के अवसरों, आपके नेटवर्क और आपकी भविष्य की भूमिकाओं पर भी विचार करें.
आगे बढ़ने के लिए निवेश
अपने आप में निवेश करना सबसे अच्छा निवेश है. कभी-कभी, एक कम वेतन वाला पद भी आपके लिए एक बड़ा निवेश हो सकता है यदि वह आपको विशेषज्ञता, उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण या मूल्यवान कनेक्शन प्रदान करता है.
उदाहरण के लिए, यदि एक फर्म आपको विदेश में किसी विशेष कानून की पढ़ाई के लिए स्पॉन्सर करती है, तो यह आपकी भविष्य की कमाई की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा, भले ही शुरुआती वेतन उतना आकर्षक न हो.
अपनी शिक्षा, प्रशिक्षण और पेशेवर विकास में निवेश करने से न डरें. ये चीजें आपको एक अधिक मूल्यवान और बाज़ार में मांग वाले पेशेवर बनाती हैं. मेरा मानना है कि आपकी क्षमताओं और ज्ञान में किया गया निवेश हमेशा सबसे अच्छा रिटर्न देता है, और यह आपकी सैलरी नेगोशिएशन में भी आपकी स्थिति को मजबूत करता है.
नेटवर्किंग का जादू
दोस्तों, इस भाग में, मैं आपको एक ऐसी चीज़ के बारे में बताने जा रहा हूँ जो मुझे लगता है कि कानूनी पेशेवरों के लिए अक्सर कम आंकी जाती है, लेकिन यह आपके करियर और वेतन दोनों को बहुत ऊपर ले जा सकती है – वो है नेटवर्किंग!
यह सिर्फ सोशल इवेंट्स में लोगों से मिलना-जुलना नहीं है, बल्कि स्थायी संबंध बनाना है जो आपको जानकारी, सलाह और अवसरों से जोड़ते हैं. मुझे याद है जब मैं नया-नया इस क्षेत्र में आया था, मुझे नेटवर्किंग की अहमियत नहीं पता थी.
लेकिन मेरे एक मेंटर ने मुझे समझाया कि आपका नेटवर्क ही आपकी नेट वर्थ है. मैंने जब सक्रिय रूप से नेटवर्किंग शुरू की, तो मुझे अनगिनत सलाह मिलीं, बाजार के रुझानों के बारे में पता चला, और मुझे उन अवसरों के बारे में जानकारी मिली जिनके बारे में मुझे शायद कभी पता भी नहीं चलता.
यह आपको उद्योग के अंदरूनी सूत्रों से जोड़ता है, जो आपको यह समझने में मदद कर सकते हैं कि विभिन्न फर्मों में क्या वेतनमान हैं और कौन सी कंपनियां बढ़ रही हैं.
संबंध बनाना और जानकारी जुटाना
नेटवर्किंग आपको न केवल नौकरी के अवसरों के बारे में बताती है, बल्कि यह आपको वेतन वार्ता के लिए महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान करती है. उद्योग के पेशेवरों से जुड़ें – चाहे वे कानूनी सलाहकार हों, भर्तीकर्ता हों, या आपके क्षेत्र के अन्य विशेषज्ञ हों.
उनसे बात करें, सवाल पूछें, और उनकी राय लें. लिंक्डइन, पेशेवर संघों के कार्यक्रम, वेबिनार और उद्योग-विशिष्ट कार्यक्रम इन कनेक्शनों को बनाने के बेहतरीन तरीके हैं.
जब आपके पास एक मज़बूत नेटवर्क होता है, तो आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपकी भूमिका और अनुभव के लिए बाजार में क्या चल रहा है. मेरे एक दोस्त ने नेटवर्किंग के ज़रिए ही एक गुप्त नौकरी के अवसर के बारे में पता लगाया था जो कभी सार्वजनिक रूप से विज्ञापित नहीं हुआ था, और उसे एक शानदार पैकेज मिला.
मेंटरशिप का महत्व
नेटवर्किंग का एक महत्वपूर्ण पहलू मेंटरशिप भी है. एक अनुभवी मेंटर आपको अपने करियर में मार्गदर्शन कर सकता है, आपको मुश्किल बातचीत से निपटने में मदद कर सकता है और आपको सही दिशा दिखा सकता है.
मेरे पास अपने करियर की शुरुआत में एक शानदार मेंटर था, जिन्होंने मुझे सिखाया कि अपनी कीमत को कैसे पहचानना है और उसे कैसे प्रस्तुत करना है. उन्होंने मुझे कुछ ऐसे महत्वपूर्ण टिप्स दिए जो मेरी वेतन वार्ताओं में बहुत काम आए.
एक मेंटर आपको उद्योग के उन अनकहे नियमों के बारे में बता सकता है जो सिर्फ अनुभव से ही पता चलते हैं. उनकी सलाह आपको गलतियां करने से बचा सकती है और आपको ऐसे निर्णय लेने में मदद कर सकती है जो आपके करियर के लिए सबसे अच्छे हों.
| पहलु | शुरुआती कानूनी सलाहकार (0-3 वर्ष का अनुभव) | मध्य-स्तर के कानूनी सलाहकार (3-7 वर्ष का अनुभव) | वरिष्ठ कानूनी सलाहकार (7+ वर्ष का अनुभव) |
|---|---|---|---|
| मुख्य फोकस | सीखना, अनुभव प्राप्त करना, कौशल विकसित करना, बाजार दर को समझना. | विशेषज्ञता बनाना, योगदान का प्रदर्शन करना, करियर पथ स्पष्ट करना, समग्र पैकेज पर ध्यान देना. | नेतृत्व क्षमता, टीम प्रबंधन, व्यवसाय विकास, दीर्घकालिक इक्विटी और लाभ. |
| वेतन वार्ता दृष्टिकोण | कम आधार पर, लेकिन विकास के अवसरों और प्रशिक्षण पर जोर दें. | अपने पिछले योगदानों और अद्वितीय कौशल को उजागर करें, डेटा-आधारित मांग रखें. | अपनी प्रतिष्ठा, बाजार मूल्य और कंपनी के लिए आप क्या मूल्य ला सकते हैं, इस पर ध्यान दें. |
| बातचीत के लिए लाभ | सीखने की इच्छा, जुनून, नई तकनीकों की जानकारी. | विशिष्ट विशेषज्ञता, सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड, क्लाइंट संबंध बनाने की क्षमता. | असाधारण अनुभव, नेतृत्व, क्लाइंट पोर्टफोलियो, व्यवसाय लाने की क्षमता. |
| मुख्य विचार | मेंटरशिप, प्रशिक्षण कार्यक्रम, करियर की स्पष्ट राह. | बोनस, प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन, स्वास्थ्य लाभ, लचीलापन. | स्टॉक विकल्प, पार्टनरशिप संभावनाएं, सेवानिवृत्ति योजना, कार्य-जीवन संतुलन. |
글을마치며
तो मेरे प्यारे कानूनी दोस्तों, मुझे उम्मीद है कि वेतन वार्ता को लेकर आपकी सारी घबराहट अब कुछ कम हुई होगी और आपको यह समझने में मदद मिली होगी कि अपनी मेहनत और काबिलियत का सही दाम कैसे पाएं. मैंने अपने अनुभव से यही सीखा है कि यह सिर्फ पैसों का खेल नहीं है, बल्कि आपके आत्मविश्वास, आपकी तैयारी और अपनी कीमत को पहचानने का खेल है. याद रखिए, आप इस क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण काम करते हैं, वह समाज और क्लाइंट्स दोनों के लिए बेहद ज़रूरी है. इसलिए, जब आप अपनी सैलरी के बारे में बात करें, तो इसे अपनी क्षमता और अपने योगदान के प्रति सम्मान के रूप में देखें. अपनी यात्रा में हर कदम पर आत्मविश्वास बनाए रखें और कभी भी अपनी प्रतिभा को कम न आंकें. मुझे पूरा विश्वास है कि इन सुझावों को अपनाकर आप अपने करियर में नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे और हमेशा वो पाएंगे जिसके आप सही हकदार हैं. यह आपके करियर को एक मजबूत आधार देगा और आपको भविष्य के लिए और भी सशक्त बनाएगा. खुद पर भरोसा रखिए!
알아두면 쓸모 있는 정보
1. लगातार सीखते रहें और विशेषज्ञता हासिल करें: कानूनी क्षेत्र हमेशा बदलता रहता है. नई तकनीकों, नए कानूनों और उभरते क्षेत्रों (जैसे साइबर कानून या डेटा गोपनीयता) के बारे में लगातार जानकारी रखें. किसी एक या दो क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता बनाएं, क्योंकि यह आपको बाज़ार में एक अनूठी पहचान दिलाएगी और आपकी मोलभाव करने की शक्ति को कई गुना बढ़ा देगी. मैंने खुद देखा है कि जो लोग लगातार सीखते रहते हैं, वे न केवल बेहतर प्रदर्शन करते हैं, बल्कि उन्हें करियर में बेहतर अवसर भी मिलते हैं. अपनी विशेषज्ञता को चमकाने के लिए वर्कशॉप, सेमिनार और ऑनलाइन कोर्स में भाग लेते रहें.
2. अपना प्रोफेशनल पोर्टफोलियो बनाएं और अपडेट रखें: अपने सफल केस, महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स, क्लाइंट फीडबैक और आपके द्वारा प्राप्त किसी भी सम्मान या मान्यता का एक रिकॉर्ड रखें. यह आपका व्यक्तिगत प्रमाण पत्र है जो आपकी क्षमता और मूल्य को दर्शाता है. वेतन वार्ता के दौरान, ये दस्तावेज़ आपको अपनी मांगों का समर्थन करने के लिए ठोस सबूत प्रदान करेंगे. एक बार मेरी एक जूनियर साथी ने अपने इंटरव्यू में अपने पोर्टफोलियो को इतने शानदार ढंग से पेश किया कि उसे तुरंत उसकी मांगी हुई सैलरी मिल गई, क्योंकि उसके पास अपनी बात साबित करने के लिए ठोस प्रमाण थे. इसे लगातार अपडेट करते रहें!
3. नेटवर्किंग और मेंटरशिप पर ध्यान दें: सिर्फ काम करने से ही नहीं, बल्कि सही लोगों से जुड़ने से भी करियर बनता है. अपने उद्योग के पेशेवरों से जुड़ें, उनसे सलाह लें और उनके अनुभवों से सीखें. लिंक्डइन, उद्योग के इवेंट्स और पेशेवर संघ इसमें आपकी मदद कर सकते हैं. एक अनुभवी मेंटर का होना आपको करियर की चुनौतियों से निपटने और सही रास्ते पर चलने में बहुत मदद कर सकता है. मैंने अपने करियर में कई बार महसूस किया है कि सही सलाह और सही कनेक्शन से आप कई सालों की गलतियों से बच सकते हैं और तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं. यह आपको बाजार के अंदरूनी रुझानों को समझने में भी मदद करेगा.
4. केवल सैलरी नहीं, पूरे पैकेज का मूल्यांकन करें: वेतन वार्ता करते समय, केवल मासिक सैलरी पर ही ध्यान न दें. स्वास्थ्य बीमा, पेड टाइम ऑफ, बोनस, रिटायरमेंट प्लान, फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑप्शंस और करियर डेवलपमेंट के अवसरों जैसे अन्य लाभों पर भी विचार करें. कई बार, एक अच्छा लाभ पैकेज कम बेस सैलरी के बावजूद आपके लिए ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है. मेरी एक दोस्त ने कम बेस सैलरी वाले ऑफर को चुना था, क्योंकि उसमें उसके लिए प्रोफेशनल ट्रेनिंग का पूरा खर्च शामिल था, जिसने उसके करियर को एक नया मोड़ दिया. हमेशा समग्र तस्वीर देखें और अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप निर्णय लें.
5. आत्मविश्वास बनाए रखें और ‘ना’ कहने की हिम्मत रखें: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी कीमत पर भरोसा रखें और बातचीत में आत्मविश्वास दिखाएं. अपनी रिसर्च को याद करें और अपने तर्कों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें. यदि कोई प्रस्ताव आपकी अपेक्षाओं या न्यूनतम स्वीकार्य सीमा से कम है, तो विनम्रता से ‘ना’ कहने की हिम्मत रखें. यह आपकी गरिमा और आपके मूल्य को बनाए रखता है. कभी-कभी, ‘ना’ कहने से आपको भविष्य में एक बेहतर अवसर मिल सकता है. मैंने खुद कई बार ‘ना’ कहकर बाद में ज़्यादा बेहतर अवसर हासिल किए हैं. अपनी सीमाओं को समझें और उन्हीं के अनुसार निर्णय लें.
중요 사항 정리
कानूनी सलाहकार के तौर पर अपनी सैलरी नेगोशिएट करना एक महत्वपूर्ण कला है, जिसमें आपकी तैयारी, आत्मविश्वास और रणनीतिक सोच मायने रखती है. अपनी कीमत को पहचानना और समझना सबसे पहला कदम है. अपनी विशिष्टता और कौशल का सही मूल्यांकन करें, यह आपको बाजार में अलग पहचान दिलाएगा. गहन बाजार रिसर्च के बिना कोई भी बातचीत अधूरी है, इसलिए अपनी भूमिका के लिए औसत वेतनमान और कंपनी की वित्तीय स्थिति का विश्लेषण ज़रूर करें. बातचीत का सही समय और प्रभावशाली संचार कौशल आपको बेहतर परिणाम दिलाते हैं; नौकरी के औपचारिक प्रस्ताव के बाद ही वेतन पर बात करें और अपनी मांगों का समर्थन डेटा के साथ करें. केवल मासिक वेतन पर ही नहीं, बल्कि कुल पैकेज में शामिल अन्य लाभों जैसे स्वास्थ्य बीमा, बोनस और करियर विकास के अवसरों पर भी ध्यान दें, क्योंकि वे आपके दीर्घकालिक कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं. अंत में, बातचीत के दौरान आत्मविश्वास बनाए रखें, सकारात्मक दृष्टिकोण रखें, और सबसे ज़रूरी, यदि कोई प्रस्ताव आपके मूल्य या लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है, तो ‘ना’ कहने की हिम्मत रखें. यह आपके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है और आपको हमेशा वो देगा जिसके आप सही हकदार हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: कानूनी सलाहकार के रूप में अपनी सैलरी बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें क्या हैं, खासकर आज के कॉम्पिटिटिव माहौल में?
उ: अरे वाह! यह सवाल तो हर कानूनी सलाहकार के दिल में होता है, है ना? मैंने अपने सालों के अनुभव में एक बात सीखी है – सिर्फ डिग्री काफी नहीं होती.
आज के दौर में, आपकी स्पेशलाइजेशन बहुत मायने रखती है. सोचिए, अगर आप किसी खास क्षेत्र में महारत हासिल करते हैं, जैसे कॉर्पोरेट लॉ, बौद्धिक संपदा (Intellectual Property), या साइबर लॉ, तो आपकी डिमांड अपने आप बढ़ जाती है और आप बेहतर सैलरी की उम्मीद कर सकते हैं.
मैंने खुद देखा है कि मेरे कुछ दोस्त जो सिर्फ “सब कुछ” करते थे, उन्हें उतनी अच्छी डील नहीं मिलती थी, जितनी उन्हें मिली जिन्होंने किसी एक चीज़ पर फोकस किया.
दूसरी बात, आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स और नेगोशिएशन पावर! यकीन मानिए, सिर्फ अच्छी कानूनी सलाह देना ही काफी नहीं है, आपको अपनी बात रखनी भी आनी चाहिए. मैंने कई ऐसे काबिल वकीलों को देखा है जो अपने काम में तो माहिर हैं, लेकिन जब सैलरी की बात आती है तो झिझक जाते हैं.
अपनी उपलब्धियों को हाईलाइट करना सीखिए – आपने कितने केस जीते, अपने क्लाइंट्स के लिए कितनी वैल्यू क्रिएट की. सिर्फ ‘मैंने काम किया’ कहने से काम नहीं चलता, ‘मैंने ये शानदार काम किया और इससे ये रिजल्ट मिले’ कहना चाहिए.
और हाँ, अपने पोर्टफोलियो को मजबूत बनाना मत भूलिए. इंटर्नशिप, प्रो बोनो काम, या किसी बड़े प्रोजेक्ट में आपकी भागीदारी, ये सब आपकी CV को दमदार बनाते हैं और आपकी सैलरी नेगोशिएशन में आपको एक एज देते हैं.
प्र: सैलरी नेगोशिएशन करते समय कानूनी सलाहकारों को किन गलतियों से बचना चाहिए, ताकि वे अपना हक पा सकें?
उ: यह एक ऐसा एरिया है जहाँ अक्सर लोग चूक जाते हैं! मैंने खुद अपने शुरुआती दिनों में कुछ गलतियाँ की हैं और उनसे बहुत कुछ सीखा है. सबसे पहली और बड़ी गलती?
रिसर्च न करना! बिना मार्केट रिसर्च के नेगोशिएशन टेबल पर जाना मतलब आधे युद्ध को पहले ही हार जाना है. आपको पता होना चाहिए कि आपके अनुभव और स्किल्स के साथ आपके जैसे लोगों को आज के बाजार में कितनी सैलरी मिल रही है.
Glassdoor या LinkedIn जैसी साइट्स पर थोड़ी रिसर्च कीजिए, अपने सीनियर्स या दोस्तों से बात कीजिए, लेकिन बिना जानकारी के कभी मत जाइए. दूसरी गलती, अपनी ‘वैल्यू’ को कम आंकना.
कई बार हमें लगता है कि हम नए हैं या शायद हमें इतनी सैलरी नहीं मिलेगी, तो हम कम पर ही मान जाते हैं. यह बिल्कुल गलत है! अपने काम की कीमत समझिए.
आपने जो भी सीखा है, जो भी अनुभव हासिल किया है, उसकी एक वैल्यू है. उसे आत्मविश्वास के साथ पेश कीजिए. मैंने एक बार एक साथी को देखा था, वह बहुत मेहनती था, लेकिन जब उसे ऑफर मिला तो वह पहली ही बात में मान गया, जबकि उसकी स्किल्स के हिसाब से वह आसानी से 15-20% और मांग सकता था.
और हाँ, सिर्फ पैसे की बात करना भी एक गलती है. नेगोशिएशन का मतलब सिर्फ बेसिक सैलरी नहीं होता. इसमें बोनस, हेल्थ इंश्योरेंस, प्रोफेशनल डेवलपमेंट के अवसर, काम के घंटे, फ्लेक्सिबिलिटी, और यहाँ तक कि भविष्य में ग्रोथ की संभावनाएँ भी शामिल होती हैं.
इन सब पर भी ध्यान दें. कभी-कभी एक अच्छा वर्क-लाइफ बैलेंस या करियर ग्रोथ का अवसर, थोड़ी कम सैलरी से भी ज़्यादा valuable होता है.
प्र: आज के समय में, कानूनी सलाहकार अपनी सैलरी नेगोशिएशन स्किल्स को कैसे बेहतर बना सकते हैं और कौन से नए तरीके अपना सकते हैं?
उ: बिल्कुल सही सवाल! देखिए, दुनिया बदल रही है और नेगोशिएशन के तरीके भी. सबसे पहले, अपनी सॉफ्ट स्किल्स पर काम करें.
सिर्फ कानून जानना ही काफी नहीं है, आपकी पर्सनैलिटी, आपका आत्मविश्वास, और लोगों से बात करने का आपका तरीका भी बहुत मायने रखता है. मैंने खुद महसूस किया है कि जब मैं किसी से बातचीत करता हूँ तो मेरे चेहरे के हाव-भाव, मेरी बॉडी लैंग्वेज, और मेरी आवाज़ का टोन, ये सब सामने वाले पर बहुत असर डालते हैं.
अपनी बात को स्पष्ट और कॉन्फिडेंस के साथ कहना सीखिए. दूसरा, आज के डिजिटल युग में, अपनी ऑनलाइन प्रेजेंस को मजबूत करें. LinkedIn पर एक्टिव रहें, अपने काम को शेयर करें, इंडस्ट्री ट्रेंड्स पर अपनी राय दें.
इससे आपकी विजिबिलिटी बढ़ती है और आपकी एक्सपर्टाइज लोगों तक पहुँचती है. कई बार, अच्छे ऑफर्स आपको आपकी ऑनलाइन प्रोफाइल देखकर ही मिल जाते हैं! और हाँ, मोलभाव को हमेशा एक ‘जीत या हार’ के तौर पर न देखें, बल्कि इसे एक ‘समझौते’ के तौर पर देखें जहाँ दोनों पक्षों को फायदा हो.
अगर आप सामने वाले की ज़रूरतों को समझते हैं और यह दिखाते हैं कि आप उनकी कंपनी के लिए कैसे वैल्यू एड कर सकते हैं, तो नेगोशिएशन आसान हो जाती है. मैंने हमेशा यही कोशिश की है कि जब मैं अपनी सैलरी की बात करूँ, तो मैं यह भी बताऊँ कि मेरे आने से या मेरी बेहतर सैलरी से कंपनी को क्या फायदा होगा.
यह सिर्फ ‘मुझे क्या मिलेगा’ से कहीं ज़्यादा ‘मैं क्या दे सकता हूँ’ के बारे में है. इससे आपको अपनी मनचाही सैलरी मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.





